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35+ Best Hanuman Jayanti Status & Shayari In Hindi

Hanuman Bhakt Shayari & Status In Hindi:- नमस्ते दोस्तों THEQUOTESHUB.COM में आपका स्वागत है ! आज के इस नई पोस्ट में हम हनुमान जी के भक्तों के लिए उनसे सम्बन्धी शायरी और स्टेटस लेकर अये है ! वो हनुमान भक्त कैसा जो राम का गुण न गये! आपने हमारे पिछले पोस्ट में ज़रूर रामी जी से सम्बंधित शायरी और स्टेटस पढ़ा होगा जो की बहुत ही सूंदर है ! उसी तरह हम आज हनुमान ऐटिटूड शायरी & स्टेटस आपको उपलब्ध करेंगे ! आप भी औरों लोगो की तरह अनुमान जी का फोटो अपने प्रोफाइल पिक्चर में रखते होंगे जो की बहुत अच्छी बात है यदि फोटो के साथ उनसे सम्बंधित शायरी या स्टेटस भी रखेंगे तो और भी अच्छा होगा तभी लोगों को पता चलेगा की आप हनुमान के कितने बड़े भक्त है ! दोस्त हमारे इस वेबसाइट के बारे में अपने दोस्तों या रिश्तेदारों से शेयर करें ता की वोलोग भी अपने भक्ति को फेसबुक के ज़रिये लोगो को दिखा सके ! THEQUOTESHUB.COM को VISIT करने के लिए आपका हार्दिक अविनन्दन है !

श्री हनुमान चालीसा

दोहा:

श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।

बरनऊँ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानि के, सुमिरौ पवन कुमार।

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा, अंजनि पुत्र पवन सुत नामा।।

महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी।

कंचन वरन विराज सुबेसा, कान्न कुण्डल कुंचित केसा।।

हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे, कान्धे मूंज जनेऊ साजे।

शंकर सुमन केसरी नन्दन, तेज प्रताप महा जग वन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिवे को आतुर।

प्रभु चरित्र सुनिवे को रसिया, राम-लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा।

भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज सवारे।।

लाए संजीवन लखन जियाए, श्री रघुबीर हरषि उर लाए।

रघुपति कीन्हि बहुत बठाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावें, अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा।।

यम कुबेर दिगपाल कहाँ ते, कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना।

जुग सहस्र जोजन पर भानु, लील्यो ताहि मधुर फल जानु।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि, जलधि लाँघ गये अचरज नाहिं।

दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुलारे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे।

सब सुख लहे तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहूँ को डरना।।

आपन तेज सम्हारो आपे, तीनों लोक हाँक ते काँपे।

भूत पिशाच निकट नहीं आवें, महावीर जब नाम सुनावें।।

नासे रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत वीरा।

संकट ते हनुमान छुड़ावें, मन क्रम वचन ध्यान जो लावें।।

सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावे, सोई अमित जीवन फल पावे।।

चारों जुग परताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा।

साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन्ह जानकी माता।

राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावें, जनम जनम के दुख विसरावें।

अन्त काल रघुवर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई।

संकट कटे मिटे सब पीरा, जपत निरन्तर हनुमत बलवीरा।।

जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो गुरुदेव की नाईं।

जो सत बार पाठ कर कोई, छूटई बन्दि महासुख होई।।

जो यह पाठ पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा।

तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा।।

दोहा

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

हनुमान जी की आरती

आरती किजे हनुमान लला की| दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरवर काँपे | रोग दोष जाके निकट ना झाँके ॥

अंजनी पुत्र महा बलदाई| संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे वीरा रघुनाथ पठाए| लंका जाए सिया सुधी लाए॥

लंका सा कोट समुंद्र सी खाई| जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जाई असुर संहारे| सियाराम जी के काज सँवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पडे सकारे| लानि संजिवन प्राण उबारे॥
पैठि पताल तोरि जम कारे| अहिरावन की भुजा उखारे॥

बायें भुजा असुर दल मारे| दाहीने भुजा सब संत जन उबारे॥
सुर नर मुनि जन आरती उतारे| जै जै जै हनुमान उचारे॥

कचंन थाल कपूर लौ छाई| आरती करत अंजना माई॥
जो हनुमान जी की आरती गावे| बसहिं बैकुंठ परम पद पावें॥

लंका विध्वंश किए रघुराई| तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥
आरती किजे हनुमान लला की| दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

हनुमान मंत्र:

मनोजवं मारुततुल्यवेगम्

जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं

श्री रामदूतं शरणं प्रपद्ये।।

दुनिया रचने वाले को भगवान कहते हैं,
और संकट हरने वाले को हनुमान कहते हैं।

स्वर्ग में देवता भी उनका अभिनंदन करते हैं
जो हर पल हनुमान जी का वंदन करते हैं..।

कण कण में विष्णु बसें जन जन में श्रीराम
प्राणों में माँ जानकी मन में बसे हनुमान।

जिनको श्रीराम का वरदान हैं, गदा धारी जिनकी शान हैं
बजरंगी जिनकी पहचान हैं, संकट मोचन वो हनुमान हैं।

बजरंग जिनका नाम हैं, सत्संग जिनका काम हैं,
ऐसे हनमंत लाल को मेरा बारम्बार प्रणाम हैं ।।

जिनके सीने में श्री राम हैं, जिनके चरणों में धाम हैं,
जिनके लिए सब कुछ दान हैं, अंजनी पुत्र वो हनुमान हैं।

जिनके मन में हैं श्री राम, जिनके तन में हैं श्री राम,
जग में सबसे हैं वो बलवान, ऐसे प्यारे न्यारे मेरे हनुमान।

पवन पुत्र जिनका नाम हैं, तिरुपति जिनका धाम हैं,
स्वामी जिनके राम हैं, बड़े वो भक्त महान हैं..।।।

चरण शरण में आयें के धरु तिहारो ध्यान,
संकट से रक्षा करो हे महावीर हनुमान।

हनुमान हैं नाम महान, हनुमान करे बेड़ा पार,
जो जपता हैं नाम हनुमान, होते सब दिन एक समान।

एक ही नारा – एक ही नाम, जय श्री राम – जय श्री राम।

ये दुनिया जो रचे वो भगवान हैं, संकट जो दूर करे वो हनुमान हैं
जिससे रूठे ये सारा संसार हैं, बजरंगी करते उससे प्यार हैं।

करो कृपा मुझ पर है हनुमान, जीवन-भर करूँ मैं तुम्हे प्रणाम
जग में सब तेरे ही गुण गाते हैं, हरदम चरणों में तेरे शीश नवाते हैं।

भीड़ पड़ी तेरे भक्तों पर बजरंगी, सुन लो अर्ज़ अब तो दाता मेरी,
हे महावीर अब तो दर्शन दे दो, पूरी कर दो तुम कामना मेरी।

निराश मन में आशा तुम जागते हो, राम जी के नाम को सबको सुनाते हो
पर्वत जैसी निश्चलता है अंदर तुम्हारे, नर्म धूप की कोमलता है अंदर तुम्हारे।

हनुमान हैं राम को सबसे प्यारे, वो तो हैं भक्तों में सबसे न्यारे,
पल-भर में तुमने लंका को जलाया, श्री राम को माता सीता से मिलाया।

हनुमान का जहाँ पल पल गुणगान हैं, चढाने से सिन्दूर उनको हर काम होता हैं
हैं भरोसा जिनको अंजनी दुलारे का वो करते भजन हनुमान प्यारे का।

हनुमान तुम बिन राम हैं अधूरे
करते तुम भक्तों के सपने पूरे
माँ अंजनी के तुम हो राजदुलारे
राम-सीता को लगते सबसे प्यारे
हैप्पी हनुमान जयंती

हनुमान हैं राम को सबसे प्यारे
वो तो हैं भक्तों में सबसे न्यारे
पल-भर में तुमने लंका को जलाया
श्री राम को माता सीता से मिलाया
हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनायें

भूत-पिशाच निकट नही आवै,
महावीर जब नाम सुनावै,
नासै रोग हरै सब पीरा,
जपत निरंतर हनुमत बीरा.

सुबह-सुबह ले हनुमान जी का नाम,
सिद्ध करेंगे तुम्हारे सब काम.

अर्ज़ मेरी सुनो अंजनी के लाल,
काट दो मेरे घोर दुखों का जाल,
तुम हो मारुती-नन्दन, दुःख-भंजन,
करूँ मैं आपको दिन रात वन्दन

हनुमान तुम बिन राम हैं अधूरे
करते तुमभक्तों के सपने पूरे
माँ अंजनी के तुम हो राजदुलारे
राम-सीता को लगते सबसे प्यारे

प्रेम प्रतिताही कापी भजे,
सदा धरे उर ध्यान,
तेहि के कारज सकल शुभ,
सिघ करे हनुमान.
**जय श्री हनुमान जय श्री राम **

हाथ जोड़ कर करूँ विनीति,
प्रभु राखियो मेरी लाज,
इस डोर को बांधे रखो,
मेरे पालनहार..

श्री राम जय राम जय जय राम,
हरे राम हरे राम हरे राम,
हनुमान जी की तरह जपते जाओ,
अपनी सारी बाधाए दूर करते जाओ.
जय वीर बजरंग बलि हनुमान की जय

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