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30+ Guru Nanak Jayanti Wishes & Status In Hindi

Guru Nanak Jayanti Wishes & Status In Hindi:- नमस्ते दोस्तों thequoteshub.com में आपका स्वागत है ! आज गुरु नानक जयंती के दिन हम आपको उनसे सम्बंधित कुछ बाते और Wishes & status प्रदान करेंगे ! सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव के शब्दों और शिक्षाओं को गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र ग्रंथों में 974 भजनों के रूप में पंजीकृत किया गया है। 10 सिख गुरुओं में से पहला गुरु नानक देव, सिख धर्म के संस्थापक माने जाते है। उनका जन्म गुरु नानक देव जयंती या गुरुपुरा के रूप में दुनिया भर में काटाक के महीने में पूर्णिमा दिवस पर मनाया जाता है, जो अक्टूबर-नवंबर के महीनों के दौरान आता है। इस साल इस अवसर को 4 नवंबर को मनाया जाएगा और यह भारत में एक राजपत्रित छुट्टी है। इनका जन्म  15 अप्रैल, 1469 को राय-भोई-डी तलवंडी (अब पाकिस्तान में, नानकाना साहिब) में हुआ था, वह “हर समय के महान धार्मिक नवप्रवर्तनकों” में से एक के रूप में जाने जाते हैं। नानक देव ने भगवान के संदेश और शिक्षण को फैलाने के लिए बड़े पैमाने पर यात्रा की। उनका मानना ​​था कि एक सर्वशक्तिमान है जो अपनी हर रचना में रहता है और अनन्त सत्य बनाता है। उन्होंने समानता, भाई प्रेम, भलाई और गुण के आधार पर विभिन्न आध्यात्मिक सामाजिक और राजनीतिक मंच स्थापित किए। सिख परंपराओं के अनुसार, नानक देव के जीवन के प्रारंभिक वर्षों को विभिन्न घटनाओं के साथ चिह्नित किया गया था, जो दिखाते थे कि उन्हें दिव्य कृपा से चिह्नित किया गया है। पांच के एक युवा लड़के के रूप में, उन्होंने दिव्य विषयों में रुचि व्यक्त की। बाद में, सात साल की उम्र में स्कूल में शामिल होने पर, माना जाता है कि उन्होंने वर्णमाला, ‘ए’ और गणितीय संस्करण ‘1’ के पहले अक्षर का वर्णन करके अपने शिक्षकों को आश्चर्यचकित कर दिया है, जैसा कि ईश्वर की एकता और एकता को दर्शाता है। बाद में, उन्होंने हिंदी, संस्कृत और फारसी सीखा। तो साड़ी बातें थी गुरु नानक से सम्बंधित । अब आप निचे दिए गए बहुत ही खूबसूरत शायरी और स्टेटस से आपने दोस्तों और रिश्तेदारों को Sms के जरिये या फेसबुक के पोस्ट में टैग करके Wish kare.

कार्तिक पूर्णिमा के दिन ‘सिख’ समुदाय के प्रथम धर्मगुरु नानक देव का जन्मोत्सव मनाया जाता हैं। सिखों के प्रथम गुरु नानक देव जी का जन्म रायभोय स्थान पर 15 अप्रैल 1469 को हुआ था लेकिन श्रद्धालु गुरु नानक जी का जन्मोत्सव कार्तिक पूर्णिमा को मनाते हैं।

गुरु नानक जी का बचपन

गुरु नानक जी बचपन से ही आध्यात्मिक व ज्ञानशील थे। गुरु नानक जी के बचपन की किस्से आज भी बेहद प्रासंगिक हैं। गुरु जी का मन तो बेशक सांसारिक जीवन में नहीं था लेकिन उन्होंने बिना संन्यास धारण किए हुए आध्यात्म की राह को चुना। उनका मानना था कि मनुष्य को संन्यासी बन अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ने का कोई अधिकार नहीं है।

गुरुनानक देव जी के सिद्धांत

गुरुनानक देव जी के सिद्धांत सिख धर्म के अनुयायियों द्वारा आज भी प्रासंगिक है, जो निम्न हैं:

* ईश्वर एक है।
* एक ही ईश्वर की उपासना करनी चाहिए।
* ईश्वर, हर जगह व हर प्राणी में मौजूद है।
* ईश्वर की शरण में आए भक्तों को किसी प्रकार का डर नहीं होता।
* निष्ठा भाव से मेहनत कर प्रभु की उपासना करें।
* किसी भी निर्दोष जीव या जन्तु को सताना नहीं चाहिए।
* हमेशा खुश रहना चाहिए।
* ईमानदारी व दृढ़ता से कमाई कर, आय का कुछ भाग जरूरतमंद को दान करना चाहिए।
* सभी मनुष्य एक समान हैं, चाहे वे स्त्री हो या पुरुष।
* शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन आवश्यक है, लेकिन लोभी व लालची आचरण से बचें है।

“धन-समृद्धि से युक्त बड़े बड़े राज्यों के राजा-महाराजों की तुलना भी उस चींटी से नहीं की जा सकती है जिसमे ईश्वर का प्रेम भरा हो.”

पूरा नाम – नानक
जन्म – 15 अप्रैल, 1469. ( Guru Nanak Birthday )
जन्मस्थान – ननकाना साहिब (तलवंडी).
पिता – कल्यानचंद (मेहता कालू )
माता – तृप्ता देवी
शिक्षा – *पंजाबी, हिन्दी फारसी तथा संस्कृत की शिक्षा ली.
विवाह – सुलक्षणा देवी के साथ.

“ना मैं एक बच्चा हूँ, ना एक नवयुवक, ना ही मैं पौराणिक हूँ, ना ही किसी जाति का हूँ.”

”शांति से अपने ही घर में खुद का विचार करे तब आपको मृत्यु का दूत छु भी नही पायेगा.”

“जिसे खुद पर विश्वास नही है वह कभी भगवान पर विश्वास कर ही नही सकता.”

“सिर्फ और सिर्फ वहि बोले जो शब्द आपको सम्मानित करते है.”

“ये दुनिया एक नाटक है जिसे सपनो में प्रस्तुत करना होता है.”

“वे लोग जिनके पास प्यार है, वे उन लोगो में से है जिन्होंने भगवान को ढूंढ लिया.”

“बंधुओं! हम मौत को बुरा नहीं कहते , यदि हम जानते कि वास्तव में मरा कैसे जाता है.”

“तुम्हारी दया ही मेरा सामाजिक दर्जा (ओहदा) है.”

“ये पूरी दुनिया कठनाइयो में है. वह जिसे खुद पर भरोसा है वही विजेता कहलाता है.”

“आप चाहे किसी भी प्रकार के बीज बोये, लेकिन उसे उचित मौसम में ही तैयार करे, यदि आप ध्यान से इन्हें देखोंगे तो पाएंगे की बीज के गुण ही उन्हें ऊपर लाते है.”

वह सब कुछ है लेकिन भगवान केवल एक ही है. उसका नाम सत्य है, रचनात्मकता उसकी शख्सियत है और अनश्वर ही उसका स्वरुप है. जिसमे जरा भी डर नही, जो द्वेष भाव से पराया है. गुरु की दया से ही इसे प्राप्त किया जा सकता है.”

“योगी को किस बात का डर होना चाहिए? पेड़, पौधे सभी उसीके अंदर और बाहर होते है.”

भगवान उन्हें ही मिलते है जो प्रेम से भरे हुए है

ना मै बच्चा हु, ना एक युवक हु, ना पौराणिक हु और ना ही किसी जाति से हु

यह दुनिया कठिनाईयों से भरा है जिसे खुद पर भरोसा होता है वही विजेता कहलाता है

उसकी चमक से ही सम्पूर्ण जगत प्रकाशवान है

कभी भी बुरा कार्य करने की सोचे भी नही और न ही कभी किसी को सताए

ईश्वर एक है उसके रूप अनेक है

सभी एक समान है और सब ईश्वर की सन्तान है

संसार को जीतने के लिए अपने कमियों और विकारो पर विजय पाना भी जरुरी है

कभी भी उसे तर्क से नही समझा जा सकता है चाहे तर्क करने में अपने कई सारे जीवन लगा दे

तेरी हजारो आँखे है फिर भी एक आँख नही, तेरे हजारो रूप है फिर भी एक रूप नही

अपने मेहनत की कमाई से जरुरतमन्द की भलाई भी करनी चाहिए

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